जब कलम को मिला आशीर्वाद: गोंडा में सम्मान का मंच बना Spiritual Showstoppe

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

गोंडा की शाम उस दिन थोड़ी अलग थी. हवा में सिर्फ ठंडक नहीं, एक आध्यात्मिक सुकून भी तैर रहा था. शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में जब रोशनी जली, तो यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि “Journalism meets Spirituality” का लाइव एक्सपीरियंस बन गया.

श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस समारोह में हिंदी न्यूज़ नाउ के संपादक प्रकाश सिंह को सम्मानित किया गया. लेकिन यह सम्मान सिर्फ एक स्मृति चिन्ह नहीं था, यह उस भरोसे की मोहर थी जो समाज आज भी सच्ची पत्रकारिता पर लगाता है.

आशीर्वाद और अवॉर्ड: जब मंच बना संदेश का माध्यम

कार्यक्रम के केंद्र में रहे पूज्य स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज जी, जिनके कर-कमलों से प्रकाश सिंह को सम्मान मिला. माहौल ऐसा था जैसे शब्द भी धीमे बोल रहे हों और भावनाएं माइक पकड़कर बोल रही हों.

स्वामी जी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि आज की पत्रकारिता “Breaking News की दौड़” से बाहर निकलकर “Building Society” का काम करे. उनका संदेश सीधा था:
“कलम अगर निष्पक्ष हो, तो समाज खुद रास्ता ढूंढ लेता है।”

पत्रकारिता: पेशा नहीं, जिम्मेदारी का दूसरा नाम

प्रकाश सिंह ने सम्मान ग्रहण करते हुए जो कहा, वह भी किसी headline से कम नहीं था. उन्होंने कहा कि उनके लिए journalism कोई job नहीं, बल्कि public service का सबसे तेज़ और प्रभावी tool है.

उनकी बातों में वो सादगी थी जो अक्सर न्यूज़रूम के शोर में खो जाती है. उन्होंने साफ कहा कि “सच्चाई दिखाना कभी आसान नहीं होता, लेकिन जरूरी हमेशा होता है.”

ग्राउंड रियलिटी vs TRP की दुनिया

आज के दौर में जहां कई चैनल “noise को news” बना रहे हैं, वहीं ऐसे सम्मान समारोह एक subtle reminder हैं कि असली पत्रकारिता अभी भी जिंदा है.

यह कार्यक्रम उन loud debates के बीच एक silent rebellion जैसा लगा, जहां बिना चिल्लाए भी बहुत कुछ कहा गया.

सीधी बात?
“यहां TRP नहीं, Trust कमाया गया.”

समाज, मीडिया और आध्यात्म का त्रिकोण

कार्यक्रम में मौजूद समाजसेवियों, धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों ने भी इस पहल की सराहना की. उनका मानना था कि जब spirituality और media साथ आते हैं, तो narrative बदलने की ताकत पैदा होती है.

यह आयोजन सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि एक blueprint था कि कैसे समाज के तीन मजबूत pillars एक साथ मिलकर positive change ला सकते हैं.

गोंडा से निकला बड़ा संदेश

इस पूरे आयोजन ने एक बात साफ कर दी— “अगर नीयत साफ हो, तो खबर भी पूजा बन सकती है।”

गोंडा में हुआ यह समारोह अब सिर्फ एक event नहीं, बल्कि एक उदाहरण बन गया है कि recognition सिर्फ award नहीं, एक responsibility भी होती है.

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